‘रेलवे आपकी संपत्ति है’ पर सामान घर उठा कर ले जाने के लिए नहीं है!

आपको सबसे पहले एक मज़ेदार बात बताती हूँ. पश्चिम रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक बीते वित्तीय वर्ष के दौरान ट्रेन में यात्रा करने वाले मुसाफिरों ने १.९५ लाख तौलिए, ८१७३६ चादरें, ५०३८ तकिए , ५५५७३  तकियो के कवर और ७०४३ कम्बल चुराए. तौलियों का तो मै मान लेती हूँ जल्दबाजी में या फिर भूल से लोग अपने सामान…

ये बच्चो को भगवानो की कहानी कैसे सुनाये?

कभी आपने अपने छोटे बच्चो को अपने हिन्दू देवी-देवताओ की कहानियाँ सुनाई है? छोटे से मेरा मतलब है ३-४ साल के बस. मैंने जब भी अपने बेटे को ऐसी कोई भी कहानी सुनाई, मुझे ऐसे सवाल जवाबो से गुजरना पड़ा कि पसीने छूट गए.. पिछले साल गणपति उत्सव के आस पास सब जगह गनेशा- गनेशा…

राखी से जुडी भावना को भी समझें ..

मुझे आज भी याद है जब मैंने अपनी माँ से पूछा था की हम राखी का त्यौहार क्यों मानते है, उन्होंने मुझे एक कहानी सुनाई थी. माँ ने बताया था की महाभारत काल में पांडव अपने इंद्रप्रस्थ राज्य में उत्सव माना रहे थे उनके हितकारी भगवान श्री कृष्णा भी वहाँ मौजूद थे. तभी शिशु पाल…

हम आजादी के मायने और महत्व जानते भी हैं या नहीं?

आजादी ऐसा शब्द है जो हमे एक अजीब सी ख़ुशी देता है, है ना? आजाद, मुक्त और एकदम स्वच्छंद..जो मन करे वो करना, जैसे मन करें रहना.. बस अपनी मर्ज़ी के मालिक..आजादी के साथ हमे आने वाला समय भी बेहतर नज़र आता है, अपना परिवार और खुशहाल दिखता है और जिंदगी आसान जान पड़ती है….

फिल्म ‘मुल्क’ का एक सन्देश हर माता पिता के नाम.. 

कल हाल में आई फिल्म “मुल्क” देखीं. मुझे फिल्म काफी पसंद आई. शायद ये असर इससे पहले देखीं फिल्म, “राजी” का था कि उसने मुझे ‘मुल्क’ देखने के लिए उत्साहित किया. राजी ने मेरे अंदर सोए हुए देश प्रेम को जगा दिया था. “मुल्क” नाम से ही लग रहा था कि इस फिल्म में अपने…

प्यारा एक बँगला हो.. क्यूँ अखिलेश जी?

जब अखिलेश जी सड़को पर साईकिल चलाते नज़र आए या फिर बिना बात ही पार्क में क्रिकेट खेलने लगे तो समझ लेना चाहिए दाल में कुछ काला है. अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में कहने पर पूर्व मुख्य-मंत्रियो से उनके आवास खाली करवाए गए. और दो मज़ेदार किस्से सामने आए इसी वजह से. पहला…

ऐसे रखें बच्चों के स्क्रीन टाइम को संतुलित

आज के समय में स्क्रीन टाइम बच्चों और पेरेंट्स के बीच मनमुटाव एक बड़ा कारण बन गया है. कितना भी टाइम बच्चे टीवी, मोबाइल या टैबलेट देखने में बिताये, वो उन्हें कम ही लगता है. यूं कहे कि उनका मन ही नहीं भरता अपनी आँखें अलग-अलग स्क्रीन्स में लगा कर. वही दूसरी तरफ मायें परेशान…