ये भरोसा भी अजब चीज है..

ये भरोसा भी अजब चीज है..कब कहा किससे उठ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

रोज कुछ न कुछ होता है कि ये भरोसा उठ जाता हैक भी समाज से, कभी आस पास के लोगो से तो कभी खुद से भी।

भरोसा उठ जाता है इस समाज से..

जब लालच जरूरत पर हावी हो जाता है,

जब शब्दों का स्तर पाताल तक गिर जाता है,

जब छोटी बच्चियों की मासूमियत कुचल दी जाती है,

जब ये कहा जाता है कि लड़कों से गलतियाँ हो जाती है,

जब झूठी खबरे सच का सर झुका देती है,

जब किसी के पैसो की गर्मी गरीब का तन झुलसा देती है,

ये भरोसा भी अजब चीज है, उठ जाए तो फिर जल्दी किसी पर नही होता।

भरोसा उठ जाता है अपनो से..

जब घर मे ही असमते लुट जाती है,

जब विरोध की आवाजें दबा दी जाती है,

जब लड़कियों को बोझ बता दिया जाता है,

जब लड़को को कुछ भी करने का सर्टिफिकेट दे दिया जाता है,

जब जरूरत में लोग काम नहीं आते,

जब ईर्ष्या में जल कर पीठ पर वार है कर जाते,

ये भरोसा भी गजब चीज है जब टूटता है अपनों से तो बड़ा दर्द देता है ।

भरोसा खुद से भी उठ जाता है..

जब हम बार बार गलत होता देख चुप रह जाते हैं,

जब हम दूसरों को अपने अहं के आगे झुकाते हैं,

जब सच जानते हुए भी हम झूठ की जय गाते हैं,

जब अपने हर कदम को सही और अगले को ग़लत बताते हैं,

क्योंकि कब तक हम मन को समझा पाएंगे,

कभी तो खुद की नज़रों में गिर ही जाएंगे,

ये भरोसा भी गजब चीज है जब खुद से उठ जाए तो जीना मुश्किल कर देता है…

ये भरोसा भी अजब चीज है..कब कहा किससे उठ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

“I’m taking my blog to the next level with Blogchatter’s My Friend Alexa.”

 

 

 

67 Comments

  1. बेशक। भरोसा तोड़ना आसान है। समय ही नही लगता। पान्डेमिक के इस माहौल में तो इंसानियत से ही भरोसा उठ गया है। बहुत बढ़िया लिखा आपने।

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