ये सप्तपर्णी की खुशबू..

यूँ ही अचानक खिड़की से आती खुशबू की तरफ ध्यान गया..

शाम का समय था और हाथ में चाय, इससे अच्छा क्या हो सकता था मन को खुश करने के लिए..

फिर लगा ये जानी पहचानी सी खुशबू तो हर साल आती है,

दुर्गा पूजा के आस पास से शुरू होकर तेज़ सर्द हवाओं के आने तक रहती है..

बाहर निकल कर देखा तो पाया कि सुनसान सड़क की तरफ जाते-जाते ये खुशबू और तेज़ हो रही है,

और उसकी मीठी और तेज़ सुरभि मेरी हर नस में घुल रही है..

पहले सामना हुआ सर्दियों के फूल पारिजात से..

जी, वही जिसे रात की रानी भी कहते हैं..

जो बाकी फूलो से अलग, लोगो के दिन नहीं रातें महकाती है,

जो रात में अँधेरे में खिल सुबह होते होते शरमा कर खुद गिर जाती है..

कहते हैं इस पारिजात को छू लेने भर से सारी थकन मिट जाती है..

पर पारिजात वो खुशबू नहीं थी जो मुझे खींच रही थी,

वो तो कुछ अलग सी कही छुपी अपनी आँखे मीच रही थी..

आगे बढ़ी खुशबू की तरफ तो पाया कि ये वो ही फूल है

जो बिना किसी शोर और दिखावे के रहता है,

जो अपनी अतर से लोगो में मन खुश कर देता है,

सप्तपर्णी, हाँ सप्तपर्णी ही नाम है उसका..

अक्टूबर के आते ही हर साल हवा इसकी खुशबू से ही सर्दियों की दस्तक देती है,

पर सात पत्तो से घिरी इस फूल की  गुच्छ खुद सबसे शरमाई सी रहती है..

कोई खास रंग नही होता इन फूलों का, वो बस पेड़ की हर एक डाल में बस जाते हैं,

जैसे भी हो माहौल आस पास का, ये अपने मौसम में खिलखिला ही जाते हैं..

सड़क के कोने पर सप्तपर्णी के कई पेड़ हैं,

जिन्होंने सभी घरो में अपनी दस्तक दे दी है..

रोमानी पर भावुक, जादुई पर सरल और तीखी पर मीठी खुशबू वाले सप्तपर्णी के फूल ये अहसास कराते हैं कि

कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनके पीछे हम भागते हैं साल दर साल,

वो कोई कीमती पत्थर हो सकता है, कोई जान से प्यारा शख्स या फिर बस एक ख्याल…

2 Comments

  1. शिप्रा आप बहुत ही अच्छी लेखिका हो और उससे भी ज्यादा भाव का प्रयोग करती हो अपनी कृतियों में । सप्तपर्णि इस पेड़ को बहुत ही करीब से कई बार देखा है और इसकी खुशबू को बहुत बार महसूस किया है सर्दियों में ही अक्सर , पर एसका नाम सप्तपर्णी है ऐसा नहीं पता था और मुझे एक अच्छा ज्ञान मिला की जो रात की रानी का जो फूल होता है उसको पारिजात बोलते हैं वह भी नहीं पता था । इन पंक्तियों मे एक एहसास छुपा रहता है जो कि किसी भी व्यक्ति विशेष को बड़ा अपना सा लगता है । आप ऐसी रचनाएं लिखती रहिए

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